बिहारशरीफ: दो दिवसीय बड़गांव छठ महोत्सव का हुआ शुभारंभ

पहली बार वर्चुअल तरीके से हो रहे आयोजन के पहले दिन ‘छठ एवं मगध’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन

0
50

बिहारशरीफ (आससे)। ऐतिहासिक सूर्य नगरी बड़गांव को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस वर्ष दो दिवसीय बड़गांव छठ महोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को वर्चुअली किया गया। महोत्सव के पहले दिन ‘छठ एवं मगध’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया था। जिसमें सारगर्भित व्याख्यान भारतीय संग्रहालय संघ के सचिव व प्रसिद्ध विरासत विज्ञानी डॉ॰ आनंद वर्द्धन ने दिया। अतिथि वक्तव्य में विश्व मगही परिषद के सचिव और हिंदुस्तान हॉटलाइन के सीईओ डॉ॰ बिपिन कुमार ने छठ की महत्ता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार उमेश प्रसाद उमेश ने किया और मंच का संचालन संजीव कुमार मुकेश ने किया। कार्यक्रम के आयोजक सूर्यनारायण जागृति मंच के संयोजक अखिलेश कुमार एवं सहसंयोजक पंकज कुमार ने कहा सूर्यनारायण जागृति मंच का निर्माण बड़गांव धाम को विश्व स्तर पे ले जाने एबं बड़गाँव सूर्यमंदिर को भव्यता प्रदान करने के साथ साथ बड़गाँव छठ करने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रहने का उत्तम इंतजाम एवं उनका देख भाल करने हेतु किया गया है। मंच के महामंत्री एवं विस्तारक संजय सिंह एवं कृष्णकांत कश्यप ने कहा हमारा मकसद है लोगो को बड़गाँव से जोड़ना एबं इस सूर्य भूमि की महत्ता का प्रचार प्रसार करना।

अपने व्याख्यान के दौरान सुप्रसिद्ध विरासत विज्ञानी एवं कला इतिहासकार और भारतीय संग्रहालय संघ के सचिव डॉ आनन्द वर्द्धन सचिव छठ पूजा मगधी परंपरा है। यह वैदिक अवधारणा पर आधारित है। इसका स्वरुप प्रकृति देवोपासना का है। जिसे अभिजनन शक्ति की उपासना माना जाता है। मगध का यह लोक पर्व है जिसका इतिहास अत्यंत प्राचीन है। मौर्य सिक्कों पर सूर्य का अंकन इसकी प्राचीनता का प्रमाण है। बोद्ध गया से भारत की प्रथम मूर्ति द्वितीय ईस्वी पूर्व की मिली है।

मगध में सूर्य मंदिरों की विराट परंपरा थी। देव औरंगाबाद का मंदिर इसमें सबसे विराट है। यह मंदिर एकसौरिय भूमिहार ब्राह्मणों जो सूर्योपासक थे उन्हे राजा भैरवेन्द्र से प्राप्त हुआ था। नालंदा का संबन्ध भी सूर्य पूजा से है विहार ग्राम जिसे बड़गाँव कहते हैं इसका प्रधान केन्द्र था। पंडारक, अंगारक, अपसढ़, हःडिया, उलार आदि सूर्य पूजा के महत्वपूर्ण केन्द्र हैं। सूर्य पूजा का छठ व्रत सविता देवता की उपासना है। मगध में बौद्धों ने भी सूर्य पूजा की अवधारणा को अपनाया।

मगध परंपरा में आर्यभट्ट और मयूरभट्ट को सूर्योपासक बताया गया है। मयूरभट्ट के वंशज मऊआर बाभनों जिन्हे सोनभदरिया कहा जाता है छठ की विराट परंपरा है। यह व्रत उमा पार्वती से संबंधित है जिस से कार्तिकेय की जन्म कथा जुड़ी हुई है। मगध की सैन्य परंपरा से छठ पूजा का गहरा संबंध है। अंग्रेज यात्रियों ने मगध के सूर्य पूजा परंपरा का उल्लेख किया है। इसमें बुकानन का आलेख महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का प्रसारण हिंदुस्तान हॉटलाइन न्यूज, कवि मित्र सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किया गया। जिसमें हजारों लोग जुड़े। इस अवसर पर मंच के बिपिन कुमार, नवलेश कुमार, सुजीत कुमार सहित कई स्वयंसेवक मौजूद थे।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें