बिहारशरीफ: ‘‘उग-उग हो सूरज देव—’’ गीत के साथ चारदिवसीय छठ अनुष्ठान संपन्न

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  • नदी एवं तालाब घाटों पर दिखा उत्सवी माहौल
  • विभिन्न समितियों द्वारा इस अवसर पर की गयी थी साफ-सफाई आदि की विशेष व्यवस्था

बिहारशरीफ (आससे)। ‘‘उग-उग हो सूरज देव…’’ के पारंपरिक गीत के साथ हीं लोक आस्था का चारदिवसीय अनुष्ठान छठ पूजा शनिवार को संपन्न हो गया। छठ पूजा को लेकर पूरे जिले में पिछले कई दिनों से उत्साह का माहौल था। शहर के बाबा मणिराम अखाड़ा, सोहसराय सूर्यमंदिर तालाब, ईमादपुर तालाब, कोसुक, बियावानी, पुरानी जेल तालाब, जेल घाट, मोरा तालाब, पटेल नगर तालाब, कंचनपुर नदी घाट आदि छठ घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। चाहे बिहारशरीफ शहर हो या फिर गांव और देहात या छोटे बाजार सभी स्थानों पर लोगों के बीच इस पर्व को लेकर उत्साह बना हुआ था।

शनिवार को लोग अहले सुबह हीं नदी और तालाब घाटों पर पहुंचकर पानी में खड़ा होकर भगवान भास्कर के उदय होने की प्रतीक्षा करते रहे। इस बीच महिलाएं भगवान भास्कर और छठी मईया का गीत गाती रही। जैसे हीं पूर्व दिशा में सूर्य की किरणें अपनी लालिमा फैलायी, लोगों ने पानी में डूबकी लगाकर आराधना शुरू कर दिया और फिर सूर्य के उदय होने के साथ ही लोग अपने हाथों में सूप लेकर खड़े हो गये। श्रद्धालु दूध और पानी का अर्पण करते रहे। और इसी के साथ पर्व का समापन हो गया। इसके पूर्व शुक्रवार की शाम लोग भगवान भास्कर के अस्त होते-होते उन्हें अर्घ्य अर्पित किया और अपने तथा अपने परिवार के लिए मंगलकामना की।

जिले के नदी एवं तालाबों में अर्घ्य देने वालों की खासी भीड़ रही। शहरों में नगर निकायों द्वारा सफाई आदि की जो-जो व्यवस्था हुई थी उससे अधिक स्वयं सेवकों ने सफाई आदि में हाथ बंटाया। गांव-ग्रामों में तो छठ को लेकर सफाई का जिम्मा ग्रामीण युवक हीं संभाल रखे थे। यह अलग बात है कि नदी घाटों और तालाबों में गहराई आदि को देखते हुए कई स्थानों पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा घेरा आदि की व्यवस्था की गयी थी ताकि लोग गहरे पानी में जाकर डूब ना पाये।

भगवान भास्कर के अर्घ्य के साथ हीं छठव्रतियों ने खरना किया और इसके साथ हीं लोग छठ का प्रसाद खाये। अपने सगे-संबंधियों और ईष्ट मित्रों के बीच प्रसाद का वितरण किया। कोविड को लेकर किसी भी छठ घाट पर मेला आदि की व्यवस्था नहीं थी। खाने-पीने के स्टॉल और दुकानें भी प्रतिबंधित था। यह अलग बात है कि चोरी-छिपे लोग कुछ स्थानों पर दुकान और स्टॉल लगा रखे थे।

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