नालंदा उद्यान महाविद्यालय बना आलू बीज उत्पादन का नोडल सेंटर

आलू के बीज के बदले रोगमुक्त बिचड़ा बनाकर आलू की खेती की तैयारी

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बिहारशरीफ (आससे)। नालंदा उद्यान महाविद्यालय में जलवायु आधारित कृषि के तहत बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के कुलपति डॉ॰ अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में पोटैटो रिसर्च पर महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर पेरू के कृषि वैज्ञानिक डॉ॰ कार्डियल, डॉ॰ यूएस सिंह के साथ बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक तथा हॉर्टिकल्चर कॉलेज नूरसराय के कृषि वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

कुलपति डॉ॰ अजय कुमार सिंह ने कहा कि जलवायु अनुकूल कृषि के तहत बिहार के आठ जिलों का चयन हुआ है, जिसमें नालंदा भी है। सूबे में 3 लाख 20 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। देश में आलू उत्पादन में बिहार का तीसरा स्थान है। ऐसे भी आलू उत्पादन में नालंदा का नाम विश्व रिकार्ड में है। ऐसे में यहां बेहतर आलू की खेती कर किसानों को और संपन्न तथा आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है, जिसके लिए बिहार  कृषि विश्वविद्यालय हरसंभव सहायता करेगी।

कृषि प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ॰ आर.के. सुहाने ने कहा कि आलू की फसल में बीज का महत्वपूर्ण रोल है। इसके उत्पादन में लागत का आधा बजट बीज में हीं खर्च होता है। ऐसे में बीज अगर अच्छा और स्वस्थ हो तो उत्पादन भी अच्छा हो सकता है। नालंदा उद्यान महाविद्यालय नूरसराय को आलू बीज उत्पादन का नोडल सेंटर बनाया गया है, जहां आलू के बीज के बदले बिचड़ा बनाया जायेगा और यह बिचड़ा रोगमुक्त होगा। इस बिचड़े को किसान 21 दिन बाद खेतों में रोपाई कर सकते है। यहां पर आलू बीज उत्पादन के लिए सूबे के किसानों को प्रशिक्षित भी किया जायेगा। अनुसंधान को पूरे राज्य में विस्तार किया जायेगा।

इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर के वैज्ञानिक डॉ॰ कार्डियल तथा डॉ॰ यूएस सिंह ने वैज्ञानिकों के डेमो देकर आलू उत्पादन, आलू बीज उत्पादन, शकरकंद उत्पादन के बारे में विस्तार से बताया। इस डेमो के माध्यम से साइंटिस्टों ने खासकर उफरी लीमा और यूसी मैट प्रजाति के बीज उत्पादन के बारे में जानकारी दी।

इस अवसर पर नूरसराय उद्यान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ॰ पंचम कुमार सिंह, कृषि अधिष्ठाता डॉ॰ रेवती रमण सिंह, कृषि प्रसार निदेशक डॉ॰ रविंद्र कुमार सुहाने, कृषि वैज्ञानिक डॉ॰ तीर्थों, डॉ॰ रंधीर कुमार, डॉ॰ विनोद कुमार, डॉ॰ एमडी ओझा, डॉ॰ रंजू, डॉ॰ सीमा, डॉ॰ सरदार सुनील सिंह, डॉ॰ संजय, डॉ॰ एन प्रभाकर, डॉ॰ एम पाल, ई. धनवान सिंह, डॉ॰ एसके चौधरी, ई. मनीष, डॉ॰ विनय कुमार, डॉ॰ महेश कुमार, डॉ॰ वीर बहादुर सिंह, डॉ॰ डीके महतो आदि लोग मौजूद थे।

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