जहानाबाद: पुलिस निभाती रहेगी इसी तरह फ़र्ज तो कैसे मिटेगा इस गरीब महिला का कर्ज!

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  • एसपी साहेब आखिर क्या है नगर थाने का मर्ज!
  • कर्ज चुकाने के लिये बैंक से निकाले 70 हजार रुपये को झपटमारों ने लूटा

जहानाबाद। शहर में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद है कि दिनदहाड़े लूट की घटनाओं को अंजाम देकर फ़रार हो जाते है और पुलिस हाथ पर हाथ धरकर बैठी रह जाती है। सबसे मानवीय पहलू यह है कि लूट की शिकार हुई महिला ने यह पैसे कर्ज चुकाने की लिए बैंक से निकाले थे और लॉकडाउन की विषम परिस्थिति में एक गरीब महिला के 70 हजार रुपये लूटने के क्या मायने है, इस बात को सहज समझा जा सकता है।

सवाल जिले के पुलिस कप्तान से है कि महज 3 किलोमीटर में फ़ैले शहर में जब इसी तरह लापरवाही से पुलिस निभाती रहेगी फ़र्ज तो एसपी साहब कैसे मिटेगा इस गरीब महिला का कर्ज! आखिर क्या है नगर थाने का मर्ज!

Jehanabad 02 2

दिनदहाड़े रूपए छीने और आराम से चलते बने

ताजा मामला नगर थाना क्षेत्र के ईदगाह के समीप का है। यहां बाइक सवार बदमाशों ने दिनदहाड़े एक महिला से रुपए से भरा थैला छीन लिया और मौके से स्टेशन की ओर चंपत हो गए। महिला के थैले में 70 हजार रुपया, बैंक के पासबुक सहित अन्य कागजात थे। मई गांव निवासी पीडि़त महिला किरण देवी ने बताया कि वह अपने पति संजय प्रसाद के साथ पीएनबी बैंक की शाखा गयी थी, जहां से महिला ने अपने खाते से 20 हजार रुपया निकाले थे।

जबकि उसके पति ने अपने एकाउंट से 50 हजार रुपये निकालकर एक थैला में रख अपने पति और बच्चे के साथ ठेला पर सवार होकर घर जा रहे थे। इसी बीच घात लगाए एक बाइक पर सवार दो बदमाशों ने दिनदहाड़े महिला से झपटा मारकर रुपये भरा थैला छीन लिया और आराम से निकल भागे।

हालांकि रुपया छीनने के दौरान महिला व उसके पति ने शोर भी मचाया, लेकिन सड़क पर चलने वाले राहगीर व दुकानदार जब तक कुछ समझ पाते बदमाश बाइक सहित फ़रार हो गए। पीडि़त महिला ने बताया कि वह कर्ज चुकाने को लेकर बैंक से पैसा निकाल कर घर जा रही थी। उन्होंने बताया कि इस बाबत उन्होंने नगर थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है।

विधि व्यवस्था पर एक-एक दिन पड़ सकता है भारी

जिस कार्यशैली से शहर में पुलिसिंग हो रही है, यकीन मानिये अपराधी कभी बड़ी घटना को अंजाम देकर शासन-प्रशासन को शर्मसार कर सकते है। शहर की विधि व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए बनी टाइगर मोबाइल खुलेआम उगाही करते नजर आ रही है। सच तो यह है कि इनलोगों ने अवैध शराब बेचने वालों के साथ एक सिंडीकेट खड़ा कर लिया है।

खैर जहाँ मेरिट की जगह चेहरे देखकर पोस्टिंग और कार्रवाई तय की जाती हो, वहां कि पुलिसिंग का भगवान ही मालिक है। वहीं प्रमाणिक शिकायतों पर भी अनजान बने रह जाना, जिले के पुलिस की फि़तरत बन गयी है। अगर इसी तरह से चलता रहा तो शहर में विधि व्यवस्था पर एक-एक दिन भारी पड़ सकता है।

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