गन्ना और जूट किसानों को केंद्र ने दिया तोहफा

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एथेनाल की कीमतों में 5 से 8 फीसदी की बढ़ोत्तरी
अब खाद्यान्न की 100 फीसदी और चीनी की 20 फीसदी पैकिंग को जूट के बैग में किया गया अनिवार्य

-आज समाचार सेवा-
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। केंद्र सरकार ने देश के जूट उद्योग को बढ़ावा देने एवं इसकी खेती में जुटे किसानों को प्रोत्साहित करने के इरादे से दो महत्वपूर्ण फैसले किये है। सरकार ने गन्ने से बनने वाले इथेनाल की कीमतों में 5 से 8 फीसदी बढ़ोत्तरी की है। साथ ही सरकार ने 100 फीसदी अनाज की पैकेजिंग के लिये जूट के बोरे को अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा चीनी की भी कम से कम 20 फीसदी पैकेजिंग जूट के ही बोरे में की जायेगी।
आज यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुयी केंद्रीय मंत्रिमंडल एवं आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में ये फैसले किये गये। बैठक के बाद इन फैसलों के बारे में जानकारी देते हुये सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2014 में ही गन्ना किसानों का बकाया चीनी मिलों द्वारा जल्द से जल्द वापस किये जाने के इरादे से गन्ने से बनने वाले एथेनाल को तीन श्रेणियों में बांट कर इसकी अलग-अलग कीमतें तय की थी। उन्होंने बताया कि चीनी से बनने वाले एथेनाल की कीमत 62.65 रुपये प्रति लीटर कर दी गयी है। इसी तरह बी हैवी एथेनाल की कीमत 57.61 रुपये और सी हैवी एथेनाल की कीमत 45.69 रुपये प्रति लीटर की गयी है।
जावड़ेकर ने बताया कि इस फैसले से चीनी मिलों के हाथ में अधिक पैसा आयेगा और वे किसानों के बकाये का भुगतान कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में 10 फीसदी एथेनाल मिलाया जाता है। इससे प्रदूषण कम होता है और पेट्रोलियम उत्पादन के निर्यात का बोझ भी घटता है।
जावड़ेकर ने बताया कि जूट सामग्री में अनिवार्य पैकेजिंग के लिये मानदंडों के विस्तार को कैबिनेट ने मंजूरी दी है। अब खाद्यान्न की 100 फीसदी और चीनी की 20 फीसदी पैकिंग जूट के बैग में होगी। इन बैगों की कीमत का निर्धारण एक समिति करेगी। उन्होंने बताया कि इस फैसले से जूट की खेती से जुड़े किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि आज जूट क्षेत्र में 4 लाख से अधिक कामगार काम करते हैं। इस लिये सरकार ने यह निर्णय लिया है। इस निर्णय से जूट उद्योग के विकास को बढ़ावा मिलेगा, कच्चे जूट की गुणवत्ता एवं उत्पादकता बढ़ेगी, जूट क्षेत्र का विविधीकरण होगा और इसके उत्पादों की मांग बढ़ेगी।
जावड़ेकर ने कहा कि बंगाल, ओडिशा, असम, मेघालय, त्रिपुरा और आंध्र प्रदेश में जूट का उत्पादन होता है। उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिये आई केयर नाम से एक कार्यक्रम किया जाता है। उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिये प्रमाणित बीज दिये जा रहे हैं, इससे जूट किसान के प्रति हेक्टेयर आय 10 हजार रुपये बढे़गी।
(समाप्त…/)

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