आनंद शर्मा बोले-शिमला से नागपुर तक कांग्रेस बिल्कुल साफ हो गई, पार्टी में बदलाव जरूरी

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नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कांग्रेस के कार्यसमिति में शामिल सदस्यों के बयानों पर नाराजगी जताई है। शर्मा ने कहा कि कार्यसमिति कि बैठक में ऐसे लोगों ने अपमानजनक टिप्पणियां की, जिन्होंने चिट्ठी पढ़ी तक नहीं थी। ऐसे लोगों को जानबूझकर हमारे उपर बयान देने कि अनुमति दी गई। सोनिया गांधी के करीबियों में भी शुमार आनंद शर्मा ने एक न्यूज चैनल तो दिए इंटरव्यू में कहा कि, यही समय है जब कांग्रेस को जाग जाना चाहिए।

न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में आनंद शर्मा ने कहा कि, जिन लोगों ने उस खत को पढ़ा भी नहीं है उन्हें कुछ भी कहने की इजाजत दे दी गई है। ये किसी सभ्य बहस का हिस्सा नहीं है। पत्र को लोगों ने अपने मन मुताबिक ढंग से पढ़ा गया है। मैंने मांग की थी कि खत को वर्किंग कमेटी के सभी सदस्यों के बीच बांटा जाए। साथ ही इस खत को आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया जाए जिससे लोगों के बीच गलतफहमी दूर हो। कि मैं सोनिया गांधी के खिलाफ नहीं हूं।

शर्मा ने कहा कि चिट्ठी हमारी एक कोशिश थी सच्चाई का एहसास दिलाने की। बीजेपी से एक संगठित कांग्रेस ही लड़ सकती है। शर्मा ने सोनिया गांधी को धन्यवाद देते हुए कहा कि इसे लिखने वाले 23 लोगों में हमारे बहुमूल्य सहयोगी भी हैं। उन्होंने कहा कि जो हुआ सो हुआ अब आगे बढ़ना चाहिए। आनंद शर्मा ने यह भी कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को दोबारा से पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध नहीं किया है। इस खत में कुछ खास नहीं बस पार्टी की स्थिति को लेकर सामूहिक चिंता थी। सच सामने आना चाहिए।

शर्मा ने कहा कि, बीजेपी को इस वक्त एक मजबूत विपक्ष ही टक्कर दे सकता है, लेकिन इसके लिए कांग्रेस का एक राजनीतिक पार्टी के तौर पर रिवाइवल जरूरी है। राहुल गांधी के सवाल पर शर्मा ने कहा कि, हम लोग ने अध्यक्ष के लिए कभी दावेदारी नहीं की, लेकिन जो हुआ है उससे हम इनकार नहीं कर सकते। हमारा शिमला से नागपुर तक सफाया हो गया है। हमें गहरा दुख हुआ है। हम अपनी शालीनता के कारण अब तक शांत थे।

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