जहानाबाद: नगर थाने में एफ़आईआर के लिए पड़ा आवेदन फ़ांकता रहा धूल

एसडीपीओ ने दिया एफ़आईआर का आदेश

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जहानाबाद। जांच के नाम पर आवेदनों को लटकाकर रखना नगर थाने की फि़तरत सी बनती जा रही है। कई मामलों को जाँच के नाम पर महीनों से लटका कर रखा जा रहा है। इसी तरह का नगर थाने से जुड़ा एक मामला सामने आया है। इस मामले में नगर परिषद के पूर्व उपमुख्य पार्षद सह वार्ड संख्या 32 के वर्तमान वार्ड पार्षद पर धोखाधड़ी की एफ़आईआर के लिए 20 अक्टूबर को दिए गए आवेदन जांच के नाम पर अब तक धूल फ़ांक रहा है।

पीड़ित दुकानदार नगर थानाध्यक्ष से लेकर प्रभारी थानाध्यक्ष तक, बार-बार न्याय की गुहार लगाता रहा। लेकिन, न तो एफ़आईआर हुई और न ही उसे कोई इंसाफ़ मिला। बार-बार कोरा आश्वासन देकर उसे थाने से चलता कर दिया गया। थक-हार कर पीड़ित दुकानदार ने तीन दिन पहले एसडीपीओ से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। पीड़ित दुकानदार की पीड़ा और एफ़आईआर के लिए सभी साक्ष्य की उपलब्धता को देखते हुए एसडीपीओ ने एफ़आईआर का आदेश दिया है। हालांकि इस संबंध में गुरुवार की देर शाम नगर थानाध्यक्ष रवि भूषण से पूछा गया तो वे अब भी जांच के बाद एफ़आईआर करने की बात कह रहे हैं।

दरअसल, पूरा मामला सामान की खरीददारी और उसके भुगतान से जुड़ा है। इरकी गांव निवासी सह एसएम इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नौमान मल्लिक का आरोप है कि 10 फ़रवरी को पूर्व उपमुख्य पार्षद कलामुद्दीन उनकी दुकान से नेरोलैक कंपनी का पेंट, बाल पुट्टी और वॉलपेपर की खरीददारी की थी। इन समानों की कुल कीमत 70 हजार 409 रुपये थी। वे एक सप्ताह में भुगतान करने की बात कह कर सामान उधार लेकर चले गए। एक सप्ताह बाद जब उन्होंने बकाया का भुगतान नहीं किया तो उनसे रुपये की मांग की।

इसके कई दिनों बाद उन्होंने क्रमशरू 20 हजार और 22 हजार रुपये का चेक दिया। जब उसने दोनों चेक को अपने खाते में हस्तांतरण के लिए जमा किया तो बैंक ने खाते में पर्याप्त राशि नहीं रहने का हवाला देते हुए चेक लौटा दिया। अर्थात चेक बाउंस हो गया। जब उसने इसकी जानकारी कलामुद्दीन को दी और दो लोगों को रुपये की मांग के लिए उनके पास भेजा। आरोप है कि वार्ड पार्षद ने दोनों के साथ अभद्र व्यवहार किया।

इसके बाद दुकानदार ने ने कानून का पालन करते हुए उन्हें वकालतन नोटिस भी भेजा। लेकिन, वार्ड पार्षद ने न तो इसका कोई जवाब दिया और न ही उनके बकाये रुपये लौटाये। पीड़ित दुकानदार का कहना है कि अंततः उन्होंने बीते 20 अक्टूबर को नगर थाने में आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई। लेकिन, जांच के नाम पर उसे बार-बार थाने से टहला दिया गया। इसके बाद उसने 23 नंवबर को एसडीपीओ से मिलकर अपनी फ़रियाद लगाई है।

इस बाबत एसडीपीओ अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि पीड़ित दुकानदार उनसे मिले थे। उन्होंने पूरे मामले की जानकारी ली है। उन्होंने कहा कि नगर थानाध्यक्ष को एफ़आईआर करने का निर्देश दिया है। यहां बताते चले कि इसके अतिरिक्त दर्जनों ऐसे मामले है जिसमे वरीय अधिकारियों के त्वरित निष्पादन के निर्देश के बावजूद मामले को लटकाकर रखा गया है।

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