कोरोना वायरस के चलते न बंधा सेहरा, न सजी मेंहदी सहालग पर कहर -दूल्हा बनने और सतरंगी सपने लिए सजन घर जाने के अरमानों पर फिरा पानी -अनगिनत शादियां हुईं स्थगित, तैयारियां पूरी कर चुके दोनों पक्षों का हुआ नुकसान

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जय आनंद
जौनपुर: पूरी दुनिया में महामारी बने कोरोना वायरस संक्रमण के चलते हुए
लॉकडाउन ने किसी के दूल्हा बनने तो किसी के सतरंगी सपने संजोए पिया के घर
जाने का सपना हाल-फिलहाल बिखेर दिया है। किसी कोरोना वारियर को ड्यूटी की
बंदिश ने रोक दिया तो किसी को शारीरिक दूरी का पालन कराने की सरकारी अमले
की सख्ती ने। अप्रैल और मई महीने माह की अनगिनत पूर्व निर्धारित शादियां
इस आपदा काल के खत्म होने तक के लिए स्थगित कर दी गई हैं। शादी की सभी
तैयारियां पूरी कर चुके वर व कन्या पक्ष दोनों को भारी नुकसान का सामना
करना पड़ा है। बानगी के तौर पर पेश हैं एेसी दो स्थगित शादियां।

45 साल बाद पौत्र को देखते दूल्हे के रूप में

डा. आलोक सिंह रघुवंशी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बक्शा में
चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात हैं। उनकी शादी 26 अप्रैल को शहर से ही
होनी तय थी। पूरा कुनबा बेहद उत्साह के साथ शादी की तैयारियाें जुटा था।
एेसा होना स्वाभाविक भी था। पूरे 45 साल बाद परिवार में किसी लड़के की
शादी होनी थी। उनके 91 वर्षीय दादा भागीरथी सिंह ने साढ़े चार दशक पहले
अपने इकलौते बेटे डा. रमेेश कुमार सिंह को सेहरा बांधा था। महीनों से वह
अपने इकलौते पौत्र डा. आलोक सिंह रघुवंशी को दूल्हेे के रूप में देखने का
सपनों में खो से गए थेे। होनी को कुछ और ही मंजूर था। स्वास्थ्य सेवा में
क्रिटिकल केयर विशेेषज्ञता के नाते डा. आलोक सिंह रघुवंशी की ड्यूटी
कोरोना वायरस संक्रमितों को चिह्नित करने में लगा दी गई। उन्होंने इसे
चुनौती के रूप में लिया और बीएचयू में जाकर वेलिंलेेटर उपचार की विशेष
ट्रेनिंग ली। फिर 14 दिन के लिए क्वारंटाइन में भेज दिए गए। इसके नाते
उनकी शादी कम से कम दिसंबर महीने तक के लिए टालनी पड़ गई।

डाककर्मी इकलौते बेटे की शादी पड़ी टालनी
धर्मापुर विकास खंड के सरैंया गांव निवासी सेना से अवकाश प्राप्त हरि
शंकर यादव प्रधान डाकघर में एमटीएस के पद पर कार्यरत और अखिल भारतीय डाक
कर्मचारी संघ पी-फोर की जिला इकाई के संगठन सचिव हैं। उनके पुत्र बीटेक
उपाधिधारक मनीष यादव की शादी छह अप्रैल को बक्शा विकास खंड के बबुरा गांव
(नौपेड़वा) निवासी अजय कुमार यादव की पुत्री शिखा यादव के साथ होनी तय
हुई थी। इकलौते बेटे की शादी धूमधाम से करने में कोई कसर बाकी न रह जाए
इसके लिए जोरों से तैयारियां कर रहे थे। छोटे भाई के बाद पहली बार घर में
किसी लड़के की शादी थी। पूरा परिवार आनंदित था। कोरोना वायरस आपदा काल
में मिली ड्यूटी को हरि शंकर यादव ने चुनौती के रूप में लिया। एेसे में
उन्होंने भी बेेटे की शादी दिसंबर महीने के लिए स्थगित कर दी है।

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