या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्व लक्ष्मी

साधकों को सिद्धि दे गयीं सिद्धिदात्री

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पटना (आससे)। गुप्त नवरात्र की नवमी साधना पूजा, पाठ, जप, हवन पूर्वक सम्पन्न किया शक्ति उपासक साधको ने। आगम के साधक मोहन, वशीकरण, उच्चाटंन, विद्वेषण, आकर्षण, मारन आदि मंत्रों की साधना कर मंत्र सिद्धि प्राप्त करते है। नवमी को मां सिद्धिदात्री अपने भक्त साधकों के समीप जाकर उन्हें सिद्धि प्रदान करती है। तांत्रिक परंपरा की यह श्रद्धा आज भी अटूट है शक्ति उपासकों के बीच।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा प्रकीर्तिता, नवमी को सिद्धिदात्री स्वरूपा मां जगदम्बा की कृपा बरसती है। घर-घर में विराजती है मां दुर्गा विविध रूप में और तदनुकूल उसका परिपालन करती है। इस आशय की पुष्टि करता है दुर्गासप्तशती का मंत्र: या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्व लक्ष्मी। पापात्मनां कितधियां हृदयेषु बुद्धि। श्रद्धाशतां कुल जन प्रभवस्सलञ्जा तां त्वां नतास्म परिपालय देविविश्वम॥ आशय है कि पुण्यात्माओं के घर मां दुर्गा लक्ष्मी बन के विराजती है।

पापात्माओं के घर दरिद्रा के रूप में कुलीन, जनो के घर में श्रद्धा रूप में विराजकर मां जगजननी जगतपालन करती है। जगत पालन जगत कल्याण की भावना एवं अवधारणा से युक्त आषाढ़ का गुप्त नवरात्र अनुष्ठान हवनपूर्वक सम्पन्न हुआ, दशमी में मंगलवार को कलश विसर्जन होगा।

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