Saturday, July 11, 2020
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बिहारशरीफ: स्वास्थ्य विभाग में चल रहे ट्रांसफर और डिप्टेशन पर डीएम ने लगाया विराम

  • डीएम के सख्ती के बाद सीएस ने 40 एएनएम का स्थानांतरण रोका
  • स्थानांतरण की कई सूचियां आनन-फानन में किया गया रद्द
  • गत वर्ष डीएम द्वारा स्थानांतरित कर्मियों को चढ़ावे के बल पर फिर से किया जा रहा था स्थानांतरित

बिहारशरीफ (आससे)। जिले में कोरोना का संक्रमण के रोज नये मामले सामने आ रहे है। स्वास्थ्य महकमा के जिला सुप्रीमो यानी कि सिविल सर्जन इन दिनों कोविड से अपना ध्यान हटाकर ट्रांसफर-पोस्टिंग और डिप्टेशन में लगा रखे है।

जून माह में स्वास्थ्य विभाग में जिले में नोट के बल पर स्थानांतरण का मोटा खेल चल रहा था, लेकिन मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आया और आखिरकार स्वास्थ्य विभाग का यह गेम फेल हो गया। आनन-फानन में सोमवार को 40 एएनएम के स्थानांतरण की लिस्ट जिसपर सिविल सर्जन की स्वीकृति की मोहर लग चुकी थी को न केवल निरस्त किया गया बल्कि इसके अगले 40 लोगों का लिस्ट भी रोक दिया गया। इसके साथ हीं स्थानांतरण की चल रही प्रक्रिया में और कई लोगों का स्थानांतरण नहीं हो सका।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला पदाधिकारी को भनक लगी कि सिविल सर्जन कोविड के बजाय स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग में लगे है, जिसके बाद डीएम ने सिविल सर्जन को तलब किया और फिर साफ-साफ आदेश दिया कि कोविड जैसे संकट के दौर में कोई स्थानांतरण, डिप्टेशन की प्रक्रिया नहीं चलेगी। इस संबंध में पूछे जाने पर जिला पदाधिकारी योगेंद्र सिंह ने कहा कि सिविल सर्जन को स्थानांतरण रोकने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि और लोगों का स्थानांतरण और डिप्टेशन की शिकायत है, जिसकी जांच होगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से सिविल सर्जन कार्यालय में पदस्थापित बाबुओं द्वारा ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर वसूली का खेल शुरू किया गया था, जिसकी चर्चा पूरे जिले में स्वास्थ्य महकमा में थी। बताया जाता है कि पिछले साल जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग में भारी संख्या में स्थानांतरण किया था, जिसके बाद प्रधान सचिव स्वास्थ्य ने यह पत्र निर्गत किया था कि अगले पांच वर्षों तक इन कर्मियों का अब कोई स्थानांतरण नहीं होगा, लेकिन सिविल सर्जन की हिम्मत देखें, जिलाधिकारी द्वारा बदले गये 11 लेबोरेटरी टेक्निशियन में से 5 का डिपुटेशन पुराने स्थान पर कर डाला। एएनएम की सूची में भी वैसी लोग थी जो पिछले साल स्थानांतरित हुई थी।     

सिविल सर्जन के स्थानांतरण और डिप्टेशन का खेल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रखंडों में क्लर्कों की पदस्थापना के बावजूद दूसरे प्रखंड के चहेता क्लर्कों को वहां प्रतिनियुक्त कर पूरा गेम कराया जाता है। उदाहरण के तौर पर हरनौत में क्लर्क के पदस्थापना के बावजूद चंडी का क्लर्क प्रभार में है। ये स्थिति गिरियक, इस्लामपुर एएनएम स्कूल में भी है। अब तो सिविल सर्जन ने प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारियों का भी प्रभार लेना शुरू कर दिया है।

बताया जाता है कि जिस प्रखंड में प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी के सेवानिवृत्ति के बाद स्थायी डॉक्टर नहीं होते हैं वहां प्रभारी का प्रभार दूसरे प्रखंडों के चिकित्सकों को देने के बजाय खुद सीएस प्रभार ले रहे है। यानी कि सीएस जिला के बाद अब प्रखंडों के प्रभार लेना शुरू किये है।

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