“बलि के बकरे” जेल में,”सरदार” का तबादला एलआईयू के सिपाही ने भी किया सरेंडर,अब सीबीसीआईडी जांच होगी!

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मऊ।गत पांच दिसम्बर को कोपागंज थाने में दर्ज कराये गये फर्जी पासपोर्ट मामले में एक नया तथ्य प्रकाश में आने पर इस मामले की सीबीसीआईडी जांच होने की संभावनाएं तेज हो गयी हैं।इस जांच के लिए आवेदन भी दिया जा चुका है।नया तथ्य यह है कि फर्जी पासपोर्ट जिन-जिन लोगों के बने,उनको एफआईआर में कहीं नामजद ही नहीं किया गया और यही नहीं,फर्जी पासपोर्ट बनने के लिए जिन पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी बनती है,उन्हें भी एफआईआर में कहीं नामजद नहीं किया गया।एफआईआर में नामजद उन्हें किया गया,जिनकी फर्जी पासपोर्ट बनने में कोई जिम्मेदारी ही नहीं बनती।इससे भी बङी बात यह है कि जिस थाना क्षेत्र में यह मुकदमा पंजीकृत किया गया,उसी थानेदार ने एफआईआर दर्ज कराया।जो पासपोर्ट की जांच और संस्तुति का असली जिम्मेदार होता है।जिसे नामजद न कर उसे वादी मुकदमा बना दिया गया और दूसरी संस्तुति के लिए एलआईयू इंस्पेक्टर,नोडल अधिकारी सीओ एवं अपर पुलिस अधीक्षक जिम्मेदार होते हैं,उन्हें नामजद न कर एलआईयू के सिपाही अनिल विश्वकर्मा और हेड कांस्टेबल संध्या मिश्रा को नामजद कर दिया गया।यही नहीं,इस असलियत को उजागर करने वाले पत्रकार ऋषिकेश पाण्डेय की हत्या का प्रयास कराने वाले फर्जी पासपोर्ट कांड के असली “सरदारों” को बचाने के लिए ताना-बाना बुनने वाले पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य को बचाने के लिए शिक़ायत की जांच एस पी से छोटे अधिकारी एवं इस प्रकरण के आरोपी अपर पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र श्रीवास्तव और सरायलखंसी,कोतवाली और दक्षिण टोला पुलिस से कराकर लीपापोती कर दी गयी।जिसे आधार बनाकर सीबीसीआईडी जांच की गुहार लगायी गयी है।बहरहाल,चंद दिनों पहले आरोपी अपर पुलिस अधीक्षक का पीएसी सोनभद्र में तबादला कर दिया गया है।इस बीच पुलिस उत्पीड़न से तंग आकर एफआईआर में नामजद एलआईयू के सिपाही अनिल विश्वकर्मा ने भी चंद दिनों पहले न्यायालय में सरेंडर कर दिया।पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि एसपी अनुराग आर्य ने एफआईआर के तुरंत बाद एलआईयू के छोटे कर्मचारियों पर न सिर्फ दस-दस हजार रुपये का ईनाम रख दिया और दोनों को बिना कारण बताओ नोटिस जारी किये ही पदीय अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए निलम्बित भी कर दिया।बल्कि उनके घरों पर 82की नोटिस भी चस्पा करा दी।समूचे प्रकरण पर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केएन शुक्ला ने “आज” से हुई विशेष बातचीत में कहा कि फर्जी पासपोर्ट मामले में उन एक दर्जन से अधिक लोगों को नामजद किया गया है,जो कहीं से जिम्मेदार ही नहीं हैं और जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है,उनके विरूद्ध एफआईआर ही नहीं किया गया है।जिससे समूचे प्रकरण में किसी बङे अधिकारी की एक सोची समझी साजिश की बू आ रही है।इसलिए इस प्रकरण की सीबीसीआईडी नहीं,बल्कि शासन को सीबीआई जांच करानी चाहिए।ताकि, पिछले छह माह से जेल की हवा खा रहे”बलि के बकरे” हलाल न होने पायें और फर्जी पासपोर्ट मामले के असली “सरदार” बचने न पायें।तभी न्याय की असली परिकल्पना साकार होगी।उल्लेखनीय है कि इस मामले की सीबीआई जांच कराने और पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर कांग्रेस एमएलसी दीपक कुमार सिंह ने इस प्रकरण को विधान परिषद में भी उठाया है।जिसकी जांच विधान परिषद की गठित समिति द्वारा भी की जा रही है।

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