Saturday, July 11, 2020
होम आज विशेष अंतरराष्ट्रीय लद्दाखमें चीनकी नयी साजिशका खुलासा

लद्दाखमें चीनकी नयी साजिशका खुलासा

लद्दाखमें चीनकी नयी साजिशका खुलासा

  • दौलतबेगमें बढ़ाये सैनिक,भारतकी गश्तका विरोध
  • सेना प्रमुखने जांबाजोंके हौसले को किया सलाम

नयी दिल्ली (आससे)। सेटेलाइज से मिली ताजा तस्वीरो से चीन की नयी साजिश का खुलासा हुआ है। चीन ने गोल्डीबेग  इलाकों में नये शिविर के साथ ही वाहनों के लिए नये रास्ते बनाये है। तस्वीरों में दिखायी दे रहा है कि गलवान घाटी में अनेक निर्माण कार्य भी कर चुका है। चीन की नयी साजिश के कारण पूर्वी लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों दो माह से चला आ रहा तनाव अब भी बना हुआ है। दो दिन पूर्व सैन्य कमाण्डरों के बीच वार्ता में दोनो सेनाओं की पीछे हटने पर सहमति बनी थी। इस बीच चीन अपने अनाप सनाप के बयान से स्थिति को बिगाडऩे को कोशिश में लगा है। भारतीय पक्ष ने साफ कर दिया है कि वह अपने देश की सीमा में सड़क सहित अन्य निर्माण कार्यो को जारी रखेगा। बीआरओ ने तनाव के बाद गोल्डीवेग इलाके सहित अन्य सड़कों का निर्माण कार्य तेज करदिया है। इस बीच भारत के थल सेनाध्यक्ष एम एम नरवणे ने दो दिन के लद्दाख दौरे के बुधवार को अंतिम दिन अग्रिम सीमा पर तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होने १५-१६ जून की रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों को झड़प के दौरान धूल चटाने वाले जवानों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। सेटेलाइट से मिली तस्वीरों से यह स्पष्टï हो चुका है कि चीनी सेना का भारतीय सीमा में घुसपैठ नहीं हुआ है। चीनी सेना एलएसी के करीब अपने क्षेत्र में काफी निर्माण कार्य कर चुकी है जो दोनो देशों के बीच हुई संधि का उल्लघन है। भारत लगातार चीन से निर्माण कार्य को ध्वस्त करने और पांच मई के पूर्व की स्थिति को बहाल करने की मांग कर रहा है। चीन वार्ता में सहमति जताने के बारे में  अडग़े डाल रहा है।
————————–
तनावके बीच भारत-चीनके अधिकारियोंने की बातचीत
नयी दिल्ली (आससे)। भारत और चीन के बीच बीते 5 मई के बाद से लद्दाख में तनाव बना हुआ है और इसे कम करने के लिए अब तक हुई सैन्य बैठकों का कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है। इस माहौल में आज पहली बार दोनों देशों के बीच विदेश मंत्रालय के स्तर पर चर्चा हुई है। बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि भारत-चीन दोनों को   वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का कड़ाई से सम्मान और निगरानी करना चाहिए।मंत्रालय ने बताया कि भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष रूप से, पूर्वी लद्दाख में स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। भारत ने चीन को पूर्वी लद्दाख में हुए घटनाक्रमों पर विस्तार से जानकारी दी। मंत्रालय ने 15 जून को गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बारे में भी चीनी समकक्ष को साफ शब्दों में बता दिया। विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि 6 जून को कमांडर स्तर की बैठक में जो बातें तय हुईं थीं, दोनों ही पक्षों को वो बातें माननी चाहिए। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए 6 जून को हुई बैठक में तमाम पहलुओं पर सहमति बनी थी। दोनों देशों को ईमानदारी से इसका पालन करना चाहिए।
भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के पूर्व एशिया के संयुक्त सचिव नवीन श्रीवास्तव और चीन विदेश मंत्रालय के महानिदेशक वू जियांगहो ने हिस्सा लिया। इस महीने पहली बार दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चा हुई है। इससे पहले सैन्य कमांडर स्तर की बैठक हो चुकी थी। कमांडर स्तर की बैठक लगभग 11 घंटे तक चली थी। इसी बीच दोनों देश सीमा पर अपनी-अपनी ताकत भी बढ़ाते जा रहे हैं। इससे पहले भारत और चीन के बीच सेनाओं को पीछे करने पर सहमति बनने के एक दिन बाद चीन के रक्षा मंत्रालय ने एलएसी पर संघर्ष के लिए भारत को पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया था। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू किआन ने कहा था क िहम आशा करते हैं कि सीमाई इलाकों शांति और स्थिरता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि भारत ने एकतरफा कार्रवाई की, जिसकी वजह से हिंसा हुई। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता किआन ने कहा कि भारत-चीन सीमा पर हुए संघर्षों की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष की है। हम आशा करते हैं कि सीमाई इलाकों में शांति और स्थिरता बनी रहेगी। गलवान घाटी में हिंसा की घटना भारतीय पक्ष के एकतरफा उकसावे की कार्रवाई और दोनों पक्षों के बीच हुई आपसी सहमति के उल्लंघन की वजह से हुई है। किआन ने कहा कि चीनी सेना कोरोना वायरस के कम होने के साथ ही युद्ध की तैयारी के लिए जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण को बढ़ा रही है। पीएलए के तिब्बत मिलिट्री कमांड ने हाल ही में पठारी इलाकों में लाइव फायर ड्रिल किया था। इसके जरिए सैनिकों की संयुक्त युद्ध क्षमता को परखा गया। यह ड्रिल नियमित रूप से हो रही है और किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है।
——————————–
गलवान की नयी सैटेलाइट तस्वीरें,झड़प वाली जगह पर चीनने किया निर्माण
नयी दिल्ली (आससे)। एलएसी पर भारतीय सेना पूरी मुस्तैदी से देश की एक-एक इंच जमीन की हिफाजत कर रही है और जब तक चीन का आखिरी सैनिक, आखिरी पोस्ट, आखिरी तंबू, आखिरी हथियार बहुत पीछे नहीं चला जाता  तब तक भारतीय सेना पीछे नहीं हटेगी। खबर तो यहां तक है कि नए गोला बारूद का ऑर्डर दे दिया है। चीन को समझ लेना चाहिए कि अगर उसने अपने बंकर खुद नहीं हटाए तो भारतीय सेना उसे उड़ाएगी। गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और  चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच कई दौर बातचीत हुई और अब दोनों देश सेना हटाने पर सहमत हो गए हैं। बता दें कि चीन की फितरत है कि जब कोई नहीं देख रहा तो दो कदम आगे बढ़ जाओ और जब टोका जाए तो एक कदम पीछे खींच लो लेकिन भारतीय सेना चाहती है कि अगर चीन ने दो कदम बढ़ाए हैं तो वह दो कदम ही पीछे हटे। वहीं अब गलवान घाटी की सैटलाइट से मिली ताजा तस्घ्वीरों से संदेह उठने लगा है कि चीन, भारत को धोखा दे रहा है। इस तस्घ्वीर में साफ नजर आ रहा है कि चीन गलवान में झड़प की जगह के पास ही बचाव के लिए बंकर बना रहा है। इस जगह पर चीन ने छोटी-छोटी दीवारें और खाई बनाई हैं। बता दें कि गलवान घाटी की ताजा सैटलाइट तस्वीरें ओपन सोर्स इंटेलिजेंस अनैलिस्ट क्मजतमेंि ने जारी की हैं। ताजा तस्घ्वीरों से अब चीन की मंशा को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि चीन बातचीत की आड़ में अपनी सैन्घ्य स्थिति को मजबूत कर रहा है। वहीं 134 किलोमीटर लंबे पैंगोंग लेक का पानी बर्फ से भी ठंडा है लेकिन यहां स्ट्रैटेजिक गर्मी बहुत है। इसी पैंगोंग लेक के पास चाइनीज आर्मी का सबसे बड़ा और नया बिल्ड अप देखा जा रहा है। क्मजतमेंि के मुताबिक चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी पैन्गॉन्ग सो झील इलाके में अभी भी डेरा जमा रखा है,पैंगोंग लेक का उत्तरी हिस्सा चीन के कब्जे में है और दक्षिणी हिस्सा हिंदुस्तान के कब्जे में। यहां एलएसी जिस जगह से गुजरती है वह फिंगर एरिया है। उसी फिंगर एरिया में चीन और भारत की सेना आमने-सामने खड़ी है। मई में करीब 5000 चीनी सैनिक उस इलाके में घुस आए हैं जहां इंडियन आर्मी पैट्रोलिंग करती थी। चीन ने बंकर बना लिए हैं, पिलबॉक्स खड़े कर लिए हैं और रिजलाइन यानी पहाड़ी चोटियों पर तोपखाना लगा लिया है। गौरतलब है कि चीन ने 1960 के बॉर्डर टॉक में भी गलवान घाटी पर दावा किया था। भारत को नक्शा दिखाया था लेकिन गलवान के वाई-नाला पर चीन ने तब खुद दावा भी नहीं किया था। हकीकत ये है कि गलवान पैट्रोलिंग प्वाइंट 14 की जगह चीनी नक्शे में भी कभी चीन का हिस्सा नहीं रहा।

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Most Popular

अन्तत: पीछे हटा चीन

डा. श्रीनाथ सहाय गलवानमें ही पीपी-१४ के पास १५ जूनको हिंसक झड़प हुई थी। तबसे भारत और चीनके...

पूर्णत: संदिग्ध है मुठभेड़

विकेश कुमार बडोला जब गुरुवारको वह उज्जैनके महाकालेश्वर मंदिरमें उपस्थित था और मध्य प्रदेश पुलिसने गुप्त सूचनापर उसे...

अद्भुत और अलौकिक होगा श्री काशी विश्वनाथ धाम

अपर मुख्य सचिव कृषि ने मंदिर परिसर का किया निरीक्षण, दर्शन पूजन करने के बाद कॉरिडोर के कार्यों की ली जानकारी

लोगोंकी जागरुकता के लिए सड़क पर उतरी पुलिस

कोरोना से लड़ाईमें प्रशासन का सहयोग करनेकी अपील दो दिवसीय सम्पूर्ण लॉकडाउनके बारेमें एसपी सिटी विकास चन्द त्रिपाठीके...

Recent Comments

Translate »