दो लाख करोड़ से ज़्यादा के बजट की तैयारियां शुरू

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भोपाल। शिवराज सरकार ने वर्ष 2020-21 का बजट विधानसभा में प्रस्तुत करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसमें कोरोना संकट के कारण लागू लॉकडाउन में हासिल की गई उपलब्धियों को एक-एक कर गिनाया जाएगा। गेहूं की रिकॉर्ड खरीद, संबल योजना की वापसी, ग्रामीणों को मनरेगा में दिए रिकॉर्ड काम, श्रम सिद्धी योजना, रोजगार सेतु पोर्टल, बिजली के क्षेत्र में दी गई रियायत सहित सभी प्रमुख काम शामिल होंगे।

वित्त विभाग ने सभी विभागों से उन उपलब्धियों का ब्योरा 15 जून तक मांगा गया है, जिन्हें वे वित्त मंत्री के बजट भाषण में शामिल कराना चाहते हैं। बजट दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा। सूत्रों के मुताबिक कोरोना संकट के कारण प्रदेश को करीब 26 हजार करोड़ रुपये के राजस्व और अनुदान सहायता का नुकसान हो चुका है। मौजूदा परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में समय लगेगा। इसका असर बजट पर पड़ेगा। विभागों को मिलने वाले बजट में कटौती तो होगी ही कुछ योजनाएं भी बंद की जाएंगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सभी विभागों को कम लाभार्थी, समान प्रकृति और लक्ष्य पूरा कर चुकी योजनाओं को चिन्हित करने के निर्देश दे चुके हैं। बताया जा रहा है कि बजट दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का तो रहेगा पर विभागों को सशर्त खर्च करने की अनुमति मिलेगी। दरअसल, कोरोना संकट के कारण राजस्व आय सीमित रहने का अनुमान है।ऐसे में आर्थिक गतिविधियां चलती रहें, विकास की गति न थमे और रोजगार मिलता रहे, इस पर फोकस रहेगा। वित्त विभाग ने राजस्व आय बढ़ाने व खर्च को सीमित करने के मकसद से सभी विभागों से नई योजना (अगर लाई जानी है तो) के औचित्य और वित्त के इंतजाम और केंद्र सरकार की नई योजना से राज्यों को मिलने वाली राशि का ब्योरा मांगा है। साथ ही 15 जून तक बजट भाषण में शामिल किए जाने वाले बिंदुओं की जानकारी मांगी है।

बताया जा रहा है कि बजट भाषण में रिकॉर्ड गेहूं खरीद, सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बांटे राशन, संबल योजना की वापसी, प्रवासी श्रमिकों के जॉबकार्ड बनाने चलाई श्रम सिद्धी योजना, प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दिलाने शुरू किए गए रोजगार सेतु पोर्टल, बिजली उपभोक्ताओं को दी गई रियायत, श्रम कानूनों में किए गए संशोधन, मंडी अधिनियम में किए गए बदलाव, निजी मंडी की व्यवस्था, रियल एस्टेट क्षेत्र को बढ़ावा देने कलेक्टर गाइडलाइन और निर्माण दर में छूट देने जैसे फैसलों का जिक्र किया जाएगा। एक लाख 66 हजार करोड़ रुपये का लेखानुदान वित्त विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 31 मार्च के पहले नए वित्तीय वर्ष के लिए विनियोग विधेयक पारित होना था, जो नहीं हो सका और विधानसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई।

ऐसे में अध्यादेश के जरिए लेखानुदान लाने का ही रास्ता बचा था, इसलिए राज्यपाल लालजी टंडन की अनुमति से 28 मार्च को एक लाख 66 करोड़ 74 लाख 81 हजार रुपये का लेखानुदान अध्यादेश लाया गया। मध्यप्रदेश के इतिहास में यह सर्वाधिक राशि का लेखानुदान है।

मुख्यमंत्री के पास पहुंची सत्र बुलाने की फाइल
विधानसभा का मानसून सत्र कब से होगा, यह मुख्यमंत्री तय करेंगे। संसदीय कार्य विभाग ने जून से सत्र बुलाना प्रस्तावित किया था, लेकिन अब यह संभव नहीं है। माना जा रहा है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त के प्रथम सप्ताह से सत्र बुलाया जा सकता है। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सत्र की अवधि ज्यादा नहीं रहेगी।
हालांकि, इसमें बजट पारित कराया जाना है और इसके लिए कम से कम 18 बैठकें होनी चाहिए, ताकि विभागीय अनुदान मांगों पर सदन में चर्चा कराकर पारित कराया जा सके। सूत्रों का कहना है कि कोरोना संकट की स्थिति को देखते हुए इसके आसार कम हैं, इसलिए एक साथ सभी विभागों की अनुदान मांगों पर मतदान कराकर बजट पारित कराया जा सकता है।

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