पटना: कोरोना का इलाज नहीं सतर्क रहें : नीतीश

कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के कार्यों की सीएम ने की समीक्षा

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  • सभी की सुरक्षा हमारा दायित्व है
  • डेंगू, कालाजार जेई व मलेरिया से बचाव की रखें अग्रिम तैयारी

(आज समाचार सेवा)

पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि सभी लोगों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। कोरोना का कोई इलाज नहीं है। सतर्कता व जागरूकता, सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क का प्रयोग ही इसका सटीक इलाज है। इससे बचाव को लेकर लोगों के बीच माइकिंग और अन्य प्रचार माध्यमों से जागरूकता अभियान चलायें। आने वाले दिनों में डेंगू, कालाजार, जेई, ,एइएस, मलेरिया आदि से बचाव को लेकर अस्पतालों में पर्याप्त इंतजाम रखें।

मुख्यमंत्री सोमवार को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लेकर किये जा रहे कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए बड़े पेमाने पर माइकिंग के साथ-साथ अन्य प्रचार माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। जागरूकता अभियान में लोगां को बताना है कि कोरोना का अब तक कोई इलाज नहीं है। लोगों को यह समझायें कि मुंह एवं नाक को ढकने के लिए मास्क का सदैव उपयोग करे। साबुन से कुछ कुछ अंतराल के बाद लगातार हाथों की सफाइ करते रहें। सोशल डिस्टेंशिसंग का पालन करें। कोरोना संक्रमण से बचाव का यही उपाय है।

सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। ६५ वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति, अन्य गंभीर  रोगों स ग्रसित व्यक्ति, गर्भवती महिलायें तथा १० वर्ष से कम उम्र के बच्चे अति आवश्यक या स्वास्थ्य संबंधी कार्य न होने पर यथा संभव घर पर ही रहें। अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों पर विशेष ध्यन देने की जरूरत है।

उन्होने कहा कि भविष्य में कोरोना संक्रमण की बढऩे की आशंका को देखते हुए तैयारी पूर्व में ही कर लें। अधिक से अधिक संख्या में लोगों की जांच करायी जाये। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताया गया कि १० हजार प्रतिदिन टेस्टिंग का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि टेस्टिंग कैपेसिटी को १५ हजार प्रतिदिन शीघ्र करने की कार्रवाई की जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सेफ्टी इक्यूमेटस, टेस्टिंग किट्स, ऑक्सीजन सिलेंडर, आदि पर्यापत संख्या को देखते हुए आवश्यक दवाओं, उपकरणों आदि की पर्याप्त संख्या मं उपलब्धता के लिए अग्रिम तैयारी रखें। पूल टेस्टिंग में गाइड लाइन का पालन करें और यथासंभव कम लोगों का ही सैंपल लें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलों में आइसोलेशन बेड्स की संख्या पूर्ण तैयारी के साथ बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही डेडिकेटेड अस्पतालों में बेड की संख्या और बढ़ायें। वैसे सरकारी भवन जो कार्यरत नहीं है वहां आइसोलेशन सेंटर बनाये जा सकते हैं। स्कूलों में आइसोलेशन सेंटर नहीं बनायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष एइएस प्रभावित मुजफ्फरपुर के पांच प्रखंडों में सोशियो इकोनॉमिक सर्वे के आधार पर जो कार्य किये गये थे, उसे एइएस प्रभावित सभी प्रखंडों में क्रियान्वित करें। जेइ के इलाज के लिए सतर्कता बरतें और जेइ टीकाकरण का कार्य अन्य जिलों में पूर्ण करें।

कालाजार के उन्मूलन के लिए पूरी तरह समर्पित होकर कार्य करने की आवश्यकता है। डेंगू बीमारी से बचाव के लिए सभी सुरक्षात्मक उपायों की पूरी तैयारी रखे। मलेरिया से बचाव के लिए सभी जगह छिडक़ाव करें। उन्होंने कहा कि लोगों को कारेाना संक्रमण के संबंध में लगातार जागरू करने की जरूरत है। लोग कोरोना संक्रमण से घबरायें नहीं। राज्य में कोरोना संक्रमितों का रिकवरी रेट ७७ प्रतिशत है। लोग धैर्य रखें, सचेत रहें और सतर्क रहें।

बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमा के अलावा स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय, मुख्य सचिव दीपक कुमार, प्रधान सचिव आपदा प्रबंधन प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, प्रधान सचिव स्वास्थ्य उदय सिंह कुमावत, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, अनुपम कुमार, सचिव स्वास्थ्य लोकेश कुमार सिंह, ओएसडी गोपाल सिंह मौजूद थे।

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