‘राष्ट्ररत्न’ : शिव प्रसाद गुप्त जी-137वीं जयंती

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‘राष्ट्ररत्न’ : शिव प्रसाद गुप्त जी🙏🌹
जन्म : 28.06.1883 पुण्यतिथि: 24.04.1944

✍️ राष्ट्रभक्त साथियों आज मातृभूमि सेवा संस्था देश के एक महान दृष्टा, महान समाज सेवक, स्वतन्त्रता सेनानी, काशी विद्यापीठ के संस्थापक, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु 1,01,000 की प्रथम राशि का सहयोग करने वाले, खादी वस्त्रों के उत्पादन व बिक्री को बढ़ावा देने हेतु 150 एकड़ की भूमि का दान करने वाले एवम् स्वतन्त्रता संग्राम के आंदोलन को बल देने के लिए 05 सितंबर, 1920 को हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘आज’ की स्थापना करने वाले ‘राष्ट्ररत्न’ बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी के प्रेरणादायी जीवन परिचय को साझा करने का प्रयास कर रही है।

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राष्ट्रभक्त बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी का जन्म बनारस, उत्तर प्रदेश के एक समृद्ध वैश्य परिवार में 28 जून, 1883 को हुआ था। उन्होंने संस्कृत, फ़ारसी और हिन्दी का अध्ययन घर पर ही किया था। उन्होंने इलाहाबाद से स्नात्तक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। पं. मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय, महात्मा गाँधी, आचार्य नरेन्द्र देव तथा डॉ. भगवान दास से बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी अत्यन्त प्रभावित थे। गुप्त जी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रियता से भाग लिया तथा दिल खोलकर क्रांतिकारी उद्देश्यों के लिए बड़ी धनराशि का सहयोग किया तथा अनेकों बार जेल गए। बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी सन् 1924 से सन् 1931 तक वे कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रहे और इस दौरान सन् 1928 में बनारस में हुई पहली राष्ट्रीय कांग्रेस का उन्होंने अपने निजी खर्च से आयोजन किया।

हिन्दी में श्रेष्ठ साहित्य रचना को बल देने के लिए उन्होंने ‘ज्ञानमण्डल’ की स्थापना सन् 1918 में की। बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी ने 05 जून, 1920 से ‘आज’ नाम से एक राष्ट्रवादी दैनिक पत्र निकाला था। ‘आज’ द्वारा हिन्दी पत्रकारिता, हिन्दी की लेखनी और हिन्दी की वाणी को राष्ट्रीय अस्मिता व स्वतन्त्रता आन्दोलन को गति देने से जोड़ा तथा उसे मुक्ति का सन्देशवाहक बनाया। भारतीय अस्मिता के प्रतीक ‘भारत माता मन्दिर’ (1936) और ‘काशी विद्यापीठ’ की स्थापना द्वारा शिवप्रसाद गुप्त ने अपनी दानवीरता को ऐतिहासिक बनाया था। अंग्रेज़ी के ‘दैनिक टुडे’, ‘मर्यादा’, ‘स्वार्थ’ आदि पत्र पत्रिकाओं से जनमानस को उन्नत बनाने में उनकी भूमिका स्तुत्य है। बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी ने राष्ट्रहित की सोच से मिस्र, इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड, अमेरिका, जापान, कोरिया, चीन, सिंगापुर आदि राष्ट्रों की यात्रा की। राष्ट्रीय शिक्षा की अनूठी परिकल्पना वाले बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी सन् 1941 तक भारत की निस्वार्थ सेवा करते रहे। वर्ष 1944 में 28 जून को इनका निधन हो गया।

राष्ट्र बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी को इस महान राष्ट्र सेवा के लिए सदैव याद रखेगा। आज बाबू शिवप्रसाद गुप्त जी के 137वीं जयंती पर समस्त भारतवासी श्रद्धा व सम्मान में नतमस्तक हैं।
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✍️ राकेश कुमार
मातृभूमि सेवा संस्था ☎️ 9891960477

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